राजभाषा

हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में १४ सितम्बर सन् १९४९ को स्वीकार किया गया। इसके बाद संविधान में राजभाषा के सम्बन्ध में धारा ३४३ से ३५२ तक की व्यवस्था की गयी। इसकी स्मृति को ताजा रखने के लिये १४ सितम्बर का दिन प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

"हिन्दी जनमन की अभिलाषा, यह राष्ट्रप्रेम की परिभाषा

भारत जिसमें प्रतिबिम्बित हो, यह ऐसी प्राणमयी भाषा।

प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी विद्यालय में हिन्दी पखवाड़ा पूर्ण हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। राजभाषा हिन्दी को देश की अस्मिता एवं संस्कृति का प्रतीक एवं संवाहक मानते हुए दिनांक १३ सितंबर 2014 से २८ सितंबर 2014 तक हिन्दी पखवाड़ा आयोजित किया गया।

 

कार्यक्रम पर विद्यालय हिन्दी को भारतीय संस्कृति व स्वाभिमान का प्रतीक माना । राष्ट्रीय एकीकरण हेतु हिन्दी को सशक्त माध्यम है, जिसके माध्यम से सम्पूर्ण भारतवर्ष को एकता के सूत्र में पिरोया जा सकता है।

 

दिनाँक १४ सितम्बर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया गया। हिन्दी पखवाड़े के अंतर्गत प्राथमिक एवं माध्यमिक दोनों प्रभागों में अनेक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जैसे सुलेख प्रतियोगिता, श्रुतलेखन, राजभाषा पर आदर्श वाक्य लेखन, निबंध लेखन एवं कविता वाचन प्रतियोगिता। हिन्दी पखवाड़े के अन्तर्गत प्रार्थना सभा पूर्णतः हिन्दी मे आयोजित की गई साथ ही प्रतिदिन राजभाषा हिन्दी पर क्रमशः एक शिक्षक द्वारा व्याख्यान दिया गया। इस अवधि में सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने स्वतः स्फूर्त होकर हिन्दी का अपने दैनिक जीवन में अधिकाधिक प्रयोग करने का संकल्प लिया। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने अधिकाधिक कार्य हिन्दी मे किए।

 

इस प्रकार विद्यालय में राजभाषा हिन्दी पखवाड़ा सफलतापूर्वक मनाया गया।

 

 भारत की भाषायी स्थिति और उसमें हिंदी के स्थान को देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि हिंदी आज भारतीय जनता के बीच राष्ट्रीय संपर्क की भाषा है। हिंदी की भाषागत विशेषता भी यह है कि उसे सीखना और व्यवहार में लाना अन्य भाषाओं के अपेक्षा ज्यादा सुविधाजनक और आसान है। हिंदी भाषा में एक विशेषता यह भी है कि वह लोक भाषा की विशेषताओं से संपन्न है, बड़े पैमाने पर लोचदार भाषा है, जिससे वह दूसरी भाषाओं में शब्दों, वाक्य-संरचना और बोलचालजन्य आग्रहों को स्वीकार करने में समर्थ है। इसके अलावा ध्यान देने की बात यह है कि हिंदी में आज विभिन्न भारतीय भाषाओं का साहित्य लाया जा चुका है। विभिन्न भारतीय भाषाओं के लेखकों को हिंदी के पाठक जानते हैं, उनके बारे में जानते हैं। भारत की भाषायी विविधता के बीच हिंदी की भाषायी पहचान मुख्यत: हिंदी है। हिंदी राष्ट्रीय एकता और भाषायी एकता का आधार है। भारत में हिंदी की जो राष्ट्रीय भूमिका है, उसे अंतरराष्ट्रीय महत्व को महसूस कराने में समर्थ है।